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आतंक के विरुद्ध जिहाद !

Posted On July 14, 2011 Tags :

पाठक चौंक रहे होंगे । मैं क्या बेवकूफाना हरकत कर रहा हूँ.सच मानिए देश में हुई अब तक की तमाम आतंकी घटनाओं में  उनसे जूझते हुए,  लड़ते हुए जामे-शहादत पी जानेवाले वो तमाम जांबाज़ मुल्क के सिपाही, अफसर और आम नागरिक ही मेरी नज़र में सबसे बड़े मुजाहिदीन हैं।

मुजाहिदीन अर्थात जिहाद , प्रतिकार, संघर्ष करनेवाला
ऐसा संघर्ष जो आतंक, अन्याय,असत्य,ज़ुल्म और अत्यचार के विरुद्ध हो। ऐसे मकसद के लिए जद्दोजिहद जिसका ईमान इंसान की जान बचाना और ज़मीन पर अमनो-अमन कायम करना हो।अबुलकलाम आजाद, भगत सिंह, अशफाक, रामप्रसाद, विद्यार्थी,नेहरू, सुभाष जैसे अनगिनत लोग हुए जिन्होंने अंग्रेजों से मुल्क को आज़ादी दिलाने के लिए जिहाद किया.और आज इतिहास उन्हें मुजाहिदे-आज़ादी कहता है।

२३/११ को भी  मुंबई में शहीद हमारे देशवासियों ने विदेशियों की नापाक साजिश से मुक्त कराने के लिए जिहद किया और शहीद तो हुए लेकिन उन्हों ने ये विश्व को दिखा दिया की तिरंगा झुकनेवाला नहीं है।इस १३ को जो हुआ.जिसने भी किया.हर ओर से घोर भर्त्सनाएँ हो रही हैं. केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि धमाकों के लिए फ़िलहाल किसी एक गुट को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.लेकिन इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि अम्रीका और पाकिस्तान पोषित मानसिकताएं बेहद चतुराई के साथ आम भारतीय युवाओं को बरगला कर उनसे धर्म और मज़हब के नाम पर ऐसे खूनी कारनामे करवा रही हैं.    लेकिन समूची इंसानियत को बंदूक की नोक पर नचाने का सपना देखने वाले इस्लाम समेत     किसी भी धर्म-सभ्यता में मुजाहिदीन नहीं कहे जा सकते।

*वे आतंकवादी हैं, उग्रवादी हैं, दहशतगर्द हैं।

**उन्होंने कठोर से कठोर सज़ा मिलनी चाहिए।*

 

उन्हें मज़हब और धर्म का इस्तेमाल करने की इजाज़त किसी भी कीमत पर नहीं मिलनीचाहिए.इस्लाम ऐसे दहशतगर्दों के लिए कठोरतम सज़ा की हिमायत करता है.मुस्लिम परिवार मेंजन्म लेने के कारण इस्लाम की थोड़ी-बहुत जो समझ, और संस्कार ने जो तमीज दी है , उसके आधार पर मैं सबसे पहले मुसलामानों से अपील करता हूँ की आप आगे आयें और इस्लाम को बदनाम करनेवाले इन दहशतगर्दों के विरुद्ध जिहाद करें.अपने सभी संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए, पूरी शक्ती के साथ आतंकवादियों का मुकाबला कीजिये,आतंकवाद की कमर तोड़ दीजिये.आपके प्यारे नबी की हदीस है ; वतनपरस्ती ॥ अपने वतन की तरफ़ बुरी नज़र से देखने की कोई हिमाक़त करे तो उसकी आँख फोड़ दीजिये।

 

जिहाद  वो नहीं जैसा नाम-निहादी कर रहे हैं बल्कि उनके ख़िलाफ़ खड़े होना जिहाद है।
*इस्लाम में जिहाद*
बे-ईमानी के विरुद्ध ईमानदारी के लिए संघर्ष।

असत्य के विरुद्ध सत्य के लिए संघर्ष।

अत्याचार, ज़ुल्म, खून-खराबा और अन्याय के विरुद्ध सद्भाव, प्रेम, अमन और न्याय के लिए संघर्ष।अब कुरान क्या कहती है:…/जो तुम पर हाथ उठाए , तुम भी उसी तरह उस पर हाथ उठा सकते हो,अलबत्ता ईश्वर सेडरते रहो और यह जान रखो कि ईश्वर उन्हीं लोगों के साथ ही जो उसकी सीमाओं के उलंघन सेबचते हैं।/
२:१९४
…/.उन लोगों से लड़ो,जो तुमसे लड़ते हैं, परन्तु ज्यादती न करो।अल्लाह ज्यादती करने वालोंको पसंद नहीं करता. /

२:१९०…/.और यदि तुम बदला लो तो बस उतना ही ले लो जितनी तुम पर ज्यादती की गयी हो.किन्तु यदि तुम सबर से काम लो तो निश्चय ही धैर्य वालों के लिए यह अधीक अच्छा है।/

१६:२६/शान्ति, सलामती इस्लाम की पहचान रही है.जभी आप एक-दूसरे से मिलने पर अस्सलाम अल्लैकुम यानी इश्वर की आप पर सलामती हो , कहते हैं.आप कुरान की ये आयत जानते ही हैं:/ /जिसने किसी की जान बचाई उसने मानो सभी इंसानों को जीवनदान दिया।/

५:३२ मुंबई के हादसे पर इंसानियत आपसे सवाल करती है.यूँ देश के तमाम मुस्लिम संस्थाओं, इमामों और उल्माओं ने घटना की कठोर निंदा के साथ दोषियों को सख्त से सख्त सज़ा की मांग की है.समय-समय पर एक मुस्लिम संघठन आतंकवाद-विरोधी जलसा वर्ष-भर से जगह-जगह आयोजित करता रहा है.किसी संगठन ने कभी अमन-मार्च भी निकालाथा .लेकिन महज़ निंदा और जलसे जुलुस से अब कुछ नहीं होने वाला अब ज़रूरत खुलकर आतंकवादियों का मुकाबला करने की है.पास-पड़ोस में पनप रही ऐसी किसी भी तरह की मानसिकता को ख़त्म करने की.सरकार और पुलिस को सहयोग करने की.संसार के सामने प्रमुख चुनौतियों में से एक है आतंकवाद!जिसका समूल नाश बेहद ज़रूरी है॥ वसुधैव कुटुंब बकम .ये हमारी विरासत है। और पगैम्बर

“हमारे अपने हमजबान से ”

 

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