मौत के गाँव से लौटकर
May 18, 2012
संजीव चन्दन
बिहार की सरकार ऐसे ही आभासी वातावरण में विकासोन्मुख , शांतिपूर्ण बिहार का वितान रच रही है -बिहारी अस्मिता को आधार दे रही है , बढ़ावा दे रही है. हालांकि सुसज्जित तहखाने के भीतर कुछ सड़ रहा है. यह सडांध बाहर से नहीं दिखता है, लेकिन बहुत दिनों तक छिपा भी नहीं रह सकता.ऐसे ही सडांध के ऊपर सामान्य सा दिखता बथानी टोला का दैनिक जीवन है, सामजिक सम्बन्ध है. बथानी टोला नरसंहार के अभियुक्तों को पटना हाई कोर्ट के द्वारा आरोपमुक्त कर दिये जाने के बाद न्याय व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न तो खड़ा हुआ ही है, साथ ही बिहार की सरकार की कार्यप्रणाली भी स्पष्ट हुई है
भाग बोस डी के आमिर खान !
May 9, 2012
आवेश तिवारी
|भ्रूण हत्या रोकने के लिए आमिर खान ,की |कंडोम पहनने के लिए सनी लियोन की , साबुन के इस्तेमाल को जानने के लिए करीना कपूर की,तो पोलियो उन्मूलन को सफल बनाने के लिए अमिताभ बच्चन की जरुरत होती है |ये कामयाबी उस वक्त और भी बढ़ जाती है जब इन विज्ञापनों में महिलाओं का इस्तेमाल किया जाता है |सीधे कहें तो आंसू ,महिलाएं और नायकों को मिला दीजिए सौ फीसदी सफल एपिसोड तैयार |लेकिन इन सबके बीच ये सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि इन विज्ञापनों ,इन धारावाहिकों से करोड़ों रूपए की कमाई करने वाले ये नायक हमारे प्रति उतने ही ईमानदार है ,जितने हम इनके लिए हैं ?
अपराध प्रदेश में तब्दील होता उत्तर प्रदेश
May 8, 2012
आवेश तिवारी
ऐसा नहीं है कि उत्तर प्रदेश में आपराधिक वारदात मायावती के शासनकाल में कम हुयी हैं ,अकेले २०१०-११ में उत्तर प्रदेश में चार हजार 401 हत्याओं समेत कुल 22 लाख 87 हजार 799 आपराधिक मामले दर्ज किए गए, जो भारत के किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे अधिक है। लेकिन समजवादी पार्टी के सत्ता में आने के बाद इसमें जबरदस्त इजाफा हुआ है |इसके एक बड़ी वजह पुलिस बल में इच्छा शक्ति की कमी ,प्रतिभावान अफसरों की क्षेत्र में नामौजूदगी और समूची कानून -व्यवस्था का राजनीतिकरण है |उत्तर प्रदेश में आम आदमी तक जानता है कि यहाँ के थाने बिकते हैं ,हर एक थाने का मूल्य निर्धारित है
रक्त -क्रान्ति का काला रंग
हमारे पास इस बात की पुख्ता जानकारी है कि ने सब जोनल कमांडर मृत्युंजय सिंह और शत्रुघ्न इत्यादि द्वारा लगातार तृतीय प्रस्तुति कमेटी के सदस्यों को घेरने की कोशिशें की जा रही है |मुन्ना विश्वकर्मा की इस पूरे मामले में भूमिका के सम्बंध में बताया जाता है कि चूँकि पी.डब्ल्यू .जी और एम.सी.सी साथ मिलकर काम करते रहे हैं इसलिए मुन्ना विश्वकर्मा को गढ़वा से वसूली गयी लेवी में भी एक हिस्सा मिलता था ,लेकिन बसंत यादव के जाने से उसे भी एक बड़ी रकम से हाँथ धोना पड़ा ऐसे में उसने भी यादवों के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया |सूत्र बताते हैं कि सी .पी आई (माओवादी) में पैसे को लेकर चल रही छिना झपटी और जाति आधारित विभेद की वजह से महज एक वर्ष के भीतर लगभग ५ हजार की संख्या में नक्सली कारकून दूसरे संगठनों में चले गए हैं |
वर्धा डायरी -१
May 1, 2012
संजीव चन्दन
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की स्थापना के १० सालों बाद व्यवहारिक तौर पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय माना है जब इससे सम्बंधित सारे मामले को केंद्रीय विश्वविद्यालय सेक्शन को भेजा गया. इसके पहले केन्द्रीय विश्वविद्यालय होने के बावजूद, इसके मामले भाषा विभाग के अधीन थे, यानी मंत्रालय के उस सेक्शन के अधीन, जो राष्ट्रभाषा प्रचार समिति या केंद्रीय हिंदी सस्थान को रेग्युलेट करता है. इस घटना से ही सरकार की कार्यप्रणाली सपष्ट होती है.नेटवर्क ६ ने इस विवादित विश्वविद्यालय के मामले सार्वजनिक विमर्श के लिए लाने का निर्णय लिया है.. मकसद है हिंदी समाज को अपने इस धरोहर के प्रति सचेत करने का. इसी कड़ी में संजीव चन्दन के डायरी के अंश हम नियमित प्रकाशित कर रहे हैं.
आप सुन रहे हैं न नामवर जी ?
May 4, 2012
संजीव चन्दन
यह पत्र मैं सिर्फ कुलाधिपति को ही नहीं लिख रहा हूँ, बल्कि हिंदी के प्रख्यात मार्क्सवादी लेखक और आलोचक को लिख रहा हूँ जो हिंदी विश्वविद्यालय की प्रत्येक गतिविधि से सरकारी और सरोकारी, स्तर पर प्रतिबद्धता से जुडा हुआ है. आपको शायद याद हो कि जब पूर्व कुलपति प्रोफ. जी. गोपीनाथन के कार्यकाल में तत्कालीन राष्ट्रपति ए.पी.जे.कलाम आने वाले थे, उस दौरान सेक्शन ऑफिसर के पद पर तत्कालीन कुलपति गोपीनाथन ने सेक्शन ऑफिसर के पद पर चयनित व्यक्ति विनोद वैद्य की जगह एक अयोग्य पात्र रीतेश कपाही को ज्वायिन करवा लिया था. छात्र संघर्ष समिति के संयोजक के नाते मैंने यह तथ्य तत्कालीन कार्यपरिषद और आपके समक्ष रखा था.
मीडिया का सबसे बड़ा टीआरपी घोटाला
April 18, 2012
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जनवरी के तीसरे हफ्ते में हिंदी समाचार चैनलों की टीआरपी पर एक नजर डालिए। क्या यह साल भर से चले रहे पैटर्न को दिखा रहा है या साप्ताहिक आधार पर चैनलों की स्थिति में मामूली बदलाव आ रहा है। इस हफ्ते शीर्ष पांच कार्यक्रम में निर्मल बाबा कहीं नहीं हैं। इसमें आज तक के चार और स्टार न्यूज का एक कार्यक्रम शामिल है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन पांचों कार्यक्रम को संबंधित चैनलों ने खुद तैयार किया है और यह सामान्य एफपीसी का हिस्सा है। इसमें किसी भी कार्यक्रम को ‘पेड’ स्लॉट नहीं बताया गया है। आश्चर्य वाली बात है कि शीर्ष पांच कार्यक्रमों में से चार कार्यक्रम न्यूज बुलेटिन हैं।
मजदूरों के पेट पर यूपी की लात
यूपी की खदानों में ज्यादातर पत्थर तोड़वा मजदूर ,छत्तीसगढ़, बिहार ,झारखण्ड और मध्य प्रदेश के है |आलम ये है कि देश के सबसे बड़े असंगठित क्षेत्र के उद्यम में जहाँ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर से २५ लाख लोगों की आजीविका जुडी थी आज सन्नाटा पसरा हुआ है ,हजारों मजदूर रोज -बरोज अपनी -अपनी झोपडियों को छोड़कर अपने -अपने गाँवों की और प्रस्थान कर रहे हैं |दरअसल उत्तर प्रदेश में खनन से शासन को भारी राजस्व के साथ ही भ्रष्ट मंत्रियों ,अफसरों और बिचौलियों को उतना ही वीआईपी शुल्क भी मिलता रहा है ,नए मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की घोषणा तो की कित्नु उन्होने उद्योगों को चालु करने का आदेश नहीं दिया
“आपरेशन आक्टोपस “पर विशेष
April 15, 2012
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भाकपा माओवादी लातेहार के कोने ओरेया व गारू के सरयू में स्थाई पुलिस पिकेट की स्थापना के बाद से खासे नाराज है। लातेहार जिले में भाकपा माओवादी के नक्सली पीएलए से विशेष प्रशिक्षण ले रहे है। पीएलए मणिपुर का प्रतिबंधित संगठन है जो यहां के नक्सलियों को गोली चलाने के साथ साथ पुलिस के खिलाफ कैसे लड़ाई लड़नी है इसके बारे में प्रशिक्षत कर रहा है। हालांकि सरयू इलाकों में सीआरपीएफ द्वारा आपरेशन होप मार्च में चलाया गया था। इसमें पुलिस को अधिक सफलता नहीं मिली थी।
हम आपको सुना रहे है इस आपरेशन पर नक्सली कमांडर मानस से एक विशेष बातचीत |निश्चित तौर पर एक पक्ष सरकार का है और दूसरा पक्ष माओवादियों का ,यहाँ सुनिए माओवादियों का पक्ष —-
हत्यारे प्रायोजक ,खतरे में ओलम्पिक
April 17, 2012
आवेश तिवारी
अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक परिषद के प्रमुख डेनिस ओसवाल्ड ने कहा है कि “हम भोपाल की त्रासदी से परिचित है और वहाँ के लोगों के प्रति हमारी पूरी संवेदनाएं है “|लेकिन सभी जानते हैं कि जिस वक्त यह दुर्घटना घटी ,डाऊ केमिकल का यूनियन कार्बाइड पर मालिकाना नहीं था तब उसे इस त्रासदी का दोषी कैसे ठहराया जा सकता है ?भारत द्वारा ओलम्पिक खेलों में डाऊ को प्रायोजन से हटाने के लिए किये गए सभी तरह के राजनैतिक प्रयासों के विफल होने के बाद कूटनीतिक कोशिशें शुरू कर दी है |लेकिन खेलों में भाग लेने के फैसले पर वो अडिग हैं |जानकारी मिल रही है कि ओलामिक खेलों के उदघाटन समारोह में भारत के खेल मत्रालय का एक प्रतिनिधिमंडल भी हिस्सा लेगा |







बिल गेट्स करेंगे धान की खेती
निर्मल बाबा के खिलाफ गैर जमानती वारंट
पुलिस लड़कियां पकडे या चोर !
प्यार ,मोहब्बत और सत्ता
सुख छिन रहा भूटान का